राजगढ़ और आगर मालवा में मोहनपुरा–कुंडालिया की सिंचाई व्यवस्था का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे है। अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान के अनुसार करीब 26,000 किलोमीटर पाइप जलाशयों का पानी खेतों तक पहुंचाती हैं। संस्थान इस व्यवस्था का क्षेत्र 2.9 लाख हेक्टेयर से अधिक बताता है।

एशियाई विकास बैंक का परियोजना विवरण खास तौर पर कुंडालिया की व्यवस्था बताता है। इसमें पंप से पानी वितरण कक्ष तक उठता है। जमीन के नीचे बिछी पाइपें आगे पानी ले जाती हैं और खेत के पास निकास मिलता है।

पंपों और पानी बांटने के ढांचे को SCADA की केंद्रीय निगरानी से जोड़ा जाता है। बैंक के विवरण में निर्णय-सहायक व्यवस्था का भी प्रावधान है। इससे बड़े वितरण तंत्र को एक साथ संचालित करने का आधार बनता है।

संस्थान के अनुसार दोनों योजनाओं का चरणबद्ध इस्तेमाल 2022 में शुरू हुआ। उसका अगस्त 2026 से फरवरी 2028 तक का अध्ययन देखेगा कि नई आपूर्ति के साथ किसान कुओं का पानी कैसे इस्तेमाल करते हैं और भूजल, खेती व लागत पर क्या असर पड़ता है।

मुख्य बातें

  • कुंडालिया के डिजाइन में पंप और वितरण कक्ष जुड़े हैं।
  • खेतों में पानी पहुंचाने वाला तंत्र केंद्रीय निगरानी से जुड़ता है।

स्रोत और संदर्भ

  1. Asian Development Bank · Madhya Pradesh Irrigation Efficiency Improvement Project ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. International Water Management Institute · Irrigation efficiency in Madhya Pradesh ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. District Rajgarh · Mohanpura Dam Rajgarh ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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